जब मैं शिक्षक के रूप में पहली बार स्कूल गया तो उस समय दिल में कई अरमान थे | अरमान खुद के लिए नहीं , अपने देश के लिए | एक विशेष उमंग थी | मैं पूर्ण आत्मविश्वास से क्लास में गया |
मेरा पहला प्रश्न था ," आप स्कूल क्यों आते हो ? "
कुछ विद्यार्थियों ने उत्तर दिया :
" पढ़ने के लिए .."
किसी ने कहा ," ताकि हमें चित्रकला आ जाए " ,
"ताकि हम खेल सकें ",
" ताकि हमें गाना आ सके |"
उन बच्चों की मासूम आँखों में मैं एक अजब सी चमक देखा , ओ मुझे बहुत प्यार से 'सर' कहते , मुझे भी 'सर' होने गर्व होता | मैं उनके साथ खेलता | उनके साथ टिफिन ख़ाता | बहुत अच्छा लगता था |
उनमें से कुछ बच्चे मुझे क्रिकेट सिखाते , कुछ नाचना | मुझे कुछ नहीं आता था, परंतु उन मासूम बच्चों से सीखने का मज़ा ही कुछ निराला था |
एक दिन मैदान पर हम फुटबाल खेल रहे थे | दो टीमें थी , एक टीम मैं और एक विद्यार्थी था , वह एक पैर से अपाहिज था | और दूसरे टीम में बाकी के सभी बच्चे थे | मैं पहली बार फूटबाल खेल रहा था | मेरी कोशिश थी की हमारी टीम जीत जाए | मैं खुद लिए नहीं , लेकिन अनुज के लिए जीतना चाहता था , क्योंकि मैं आनुज को ए बताना चाहता था कि भले वह सीधे चल नहीं सकता , लेकिन वह भी बाकी बच्चों की तरह खेल सकता है |
हमने बहुत मज़ा किया | हमारी टीम जीत गयी | अनुज बहुत खुश था |
आख़िरी पीरियड में उसने जो कहा , ओ आज भी मेरे कानों में गूँज रहा है ," सर, आज पहली बार मैं इतना खेला , आज मुझे लगा कुछ दिनों में भाग सकूँगा | सर , जब मैं भागने की कोशिश करता हूँ तो मुझे मेरे माँ के शब्द सुनाए देते है ,' बेटा , भाग मत तू गिर जाएगा ..'
मैंने उत्तर दिया, " अब ,आप माँ को बोलो , माँ मुझे भागने दो , मैं गिर कर फिर उठुंगा और फिर उससे भी ज़ोर से भागुँगा |"
मेरा पहला प्रश्न था ," आप स्कूल क्यों आते हो ? "
कुछ विद्यार्थियों ने उत्तर दिया :
" पढ़ने के लिए .."
किसी ने कहा ," ताकि हमें चित्रकला आ जाए " ,
"ताकि हम खेल सकें ",
" ताकि हमें गाना आ सके |"
उन बच्चों की मासूम आँखों में मैं एक अजब सी चमक देखा , ओ मुझे बहुत प्यार से 'सर' कहते , मुझे भी 'सर' होने गर्व होता | मैं उनके साथ खेलता | उनके साथ टिफिन ख़ाता | बहुत अच्छा लगता था |
उनमें से कुछ बच्चे मुझे क्रिकेट सिखाते , कुछ नाचना | मुझे कुछ नहीं आता था, परंतु उन मासूम बच्चों से सीखने का मज़ा ही कुछ निराला था |
एक दिन मैदान पर हम फुटबाल खेल रहे थे | दो टीमें थी , एक टीम मैं और एक विद्यार्थी था , वह एक पैर से अपाहिज था | और दूसरे टीम में बाकी के सभी बच्चे थे | मैं पहली बार फूटबाल खेल रहा था | मेरी कोशिश थी की हमारी टीम जीत जाए | मैं खुद लिए नहीं , लेकिन अनुज के लिए जीतना चाहता था , क्योंकि मैं आनुज को ए बताना चाहता था कि भले वह सीधे चल नहीं सकता , लेकिन वह भी बाकी बच्चों की तरह खेल सकता है |
हमने बहुत मज़ा किया | हमारी टीम जीत गयी | अनुज बहुत खुश था |
आख़िरी पीरियड में उसने जो कहा , ओ आज भी मेरे कानों में गूँज रहा है ," सर, आज पहली बार मैं इतना खेला , आज मुझे लगा कुछ दिनों में भाग सकूँगा | सर , जब मैं भागने की कोशिश करता हूँ तो मुझे मेरे माँ के शब्द सुनाए देते है ,' बेटा , भाग मत तू गिर जाएगा ..'
मैंने उत्तर दिया, " अब ,आप माँ को बोलो , माँ मुझे भागने दो , मैं गिर कर फिर उठुंगा और फिर उससे भी ज़ोर से भागुँगा |"