Sunday, 25 September 2016

भाग मत ,तू गिर जाएगा ..

जब मैं शिक्षक के रूप में पहली बार स्कूल गया तो उस समय दिल में  कई अरमान थे | अरमान खुद के लिए नहीं , अपने देश के लिए | एक विशेष उमंग थी |  मैं  पूर्ण आत्मविश्वास से  क्लास में गया |
मेरा पहला प्रश्न था ," आप स्कूल क्यों आते हो ? "

कुछ  विद्यार्थियों ने उत्तर  दिया :

" पढ़ने के लिए .."

किसी ने कहा ," ताकि  हमें  चित्रकला आ जाए " ,

"ताकि हम  खेल  सकें ",
" ताकि   हमें गाना आ सके |"

उन बच्चों की मासूम आँखों में मैं एक अजब सी  चमक देखा , ओ मुझे बहुत प्यार से 'सर' कहते , मुझे भी 'सर' होने गर्व होता |  मैं उनके साथ खेलता | उनके साथ टिफिन ख़ाता |  बहुत  अच्छा लगता था |
उनमें से कुछ  बच्चे मुझे क्रिकेट सिखाते , कुछ नाचना | मुझे कुछ नहीं आता  था, परंतु उन मासूम बच्चों से सीखने का मज़ा ही कुछ निराला था |

एक दिन मैदान पर हम फुटबाल खेल  रहे थे | दो टीमें थी , एक टीम  मैं और एक विद्यार्थी था , वह एक पैर से अपाहिज था | और  दूसरे टीम में बाकी के सभी बच्चे थे |  मैं  पहली बार फूटबाल खेल रहा था | मेरी कोशिश थी की हमारी टीम जीत जाए |  मैं खुद लिए नहीं , लेकिन अनुज के लिए जीतना चाहता था ,  क्योंकि मैं आनुज को ए बताना चाहता था    कि  भले वह सीधे  चल नहीं सकता , लेकिन वह भी बाकी बच्चों की तरह खेल सकता है |
हमने बहुत मज़ा किया | हमारी टीम जीत गयी | अनुज बहुत खुश  था |
आख़िरी  पीरियड में उसने जो कहा , ओ आज भी मेरे कानों में गूँज  रहा है ," सर, आज पहली बार मैं इतना खेला , आज मुझे लगा कुछ दिनों  में भाग सकूँगा | सर , जब मैं भागने की  कोशिश करता हूँ तो  मुझे मेरे माँ के शब्द सुनाए देते है ,' बेटा , भाग मत तू गिर जाएगा ..'
मैंने उत्तर दिया, " अब ,आप माँ को बोलो , माँ मुझे भागने दो , मैं गिर कर फिर उठुंगा और फिर  उससे भी ज़ोर से भागुँगा |"